नारायण सेवा संस्थान में 51 जोड़ों का सामूहिक विवाह
उदयपुर में नारायण सेवा संस्थान के 45वें सामूहिक विवाह में 51 दिव्यांग व निर्धन जोड़ों ने लिए सात फेरे।
उदयपुर में मानवता और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला जब नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ, लियों का गुड़ा परिसर में आयोजित 45वें दिव्यांग एवं निर्धन नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह का समापन भावनाओं और आशीर्वाद के साथ हुआ। दो दिवसीय इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए 51 दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चारण और पवित्र अग्नि की साक्षी में सात फेरे लेकर अपने जीवन की नई शुरुआत की।
इस समारोह में शामिल कई युवक-युवतियाँ ऐसे थे जिन्होंने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद जीवन में हार नहीं मानी। कुछ पैरों से दिव्यांग हैं, कुछ एक हाथ या पैर से, जबकि कुछ दृष्टिबाधित हैं। जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले ये जोड़े अब एक-दूसरे का सहारा बनकर नए सपनों और उम्मीदों के साथ आगे बढ़ेंगे।
विशेष बात यह रही कि इन जोड़ों में से अधिकांश ने पहले नारायण सेवा संस्थान में नि:शुल्क सर्जरी, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और पुनर्वास सेवाओं का लाभ लिया है। संस्थान द्वारा दिए गए कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से कई लाभार्थियों ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं।
समारोह में शामिल कुल 51 जोड़ों में से 25 दिव्यांग और 26 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं। गुजरात के बनासकांठा जिले के विजय गमार ने उदयपुर के चिखला गुड़ा की मंजू को जीवनसंगिनी के रूप में स्वीकार किया। मंजू पैरों से दिव्यांग हैं, लेकिन विजय का कहना है कि उन्हें विश्वास है कि मंजू उनके जीवन को खुशियों और उम्मीदों से भर देंगी।
पारंपरिक रस्मों के साथ सम्पन्न हुए सात फेरे
समारोह की शुरुआत प्रातः 10 बजे पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मंगल ध्वनियों के साथ हुई। सभी जोड़ों का स्वागत कर तोरण की रस्म सम्पन्न कराई गई। इसके बाद पुष्पों से सुसज्जित मंच पर वर-वधुओं ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई।
इसके पश्चात 51 वेदियों पर आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ विवाह की सभी रस्में पूरी कराई गईं। सात फेरे लेते समय हर जोड़े ने जीवनभर साथ निभाने के सात पवित्र वचनों को स्वीकार किया।
नवदंपतियों को गृहस्थी बसाने की सौगात
नारायण सेवा संस्थान की ओर से प्रत्येक नवदंपति को नई गृहस्थी बसाने के लिए आवश्यक सामग्री भेंट की गई। इसमें पलंग, बिस्तर, अलमारी, बर्तन, गैस चूल्हा, डिनर सेट, पंखा सहित अन्य जरूरी घरेलू सामान शामिल था।
इसके अलावा कन्यादानियों और अतिथियों ने भी नवविवाहित जोड़ों को मंगलसूत्र, चूड़ियाँ, पायल और अन्य उपहार भेंट कर उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा समारोह
समारोह के दौरान शिव-पार्वती और कृष्ण-रुक्मिणी विवाह पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। विवाह के बाद नववधुओं की प्रतीकात्मक डोली विदाई के भावुक क्षणों ने पूरे वातावरण को भावनाओं से भर दिया, जहाँ खुशी और संवेदनाओं के आँसू एक साथ दिखाई दिए।
समरस समाज के निर्माण का संदेश
संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जब समाज सेवा और संवेदना की भावना से आगे बढ़ता है, तभी एक समरस और सशक्त भारत का निर्माण संभव होता है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि दर्शना मेहता, यश मेहता और ओम प्रकाश सोनी सहित संस्थान के संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, कमला देवी, वंदना अग्रवाल, पलक अग्रवाल सहित कई दानदाता, अतिथि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि नारायण सेवा संस्थान अब तक 2510 दिव्यांग और निर्धन युवक-युवतियों के विवाह सम्पन्न कराकर सामाजिक सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल स्थापित कर चुका है।