महिला सशक्तिकरण और साहित्य पर चर्चा के साथ जयपुर एजुकेशन समिट का समापन

शिक्षा, समाज और समकालीन मुद्दों पर राष्ट्रीय विमर्श को मंच देने वाला जयपुर एजुकेशन समिट (जेईएस) अपने सातवें संस्करण के समापन के साथ एक बार फिर वैचारिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त उदाहरण बना।

JR Choudhary
JR Choudhary Official | Verified Expert • 05 Aug, 2014 Chief Editor
Jan 28, 2026 • 5:52 PM | जयपुर  0
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2 months ago
महिला सशक्तिकरण और साहित्य पर चर्चा के साथ जयपुर एजुकेशन समिट का समापन
शिक्षा, समाज और समकालीन मुद्दों पर राष्ट्रीय विमर्श को मंच देने वाला जयपुर एजुकेशन समिट (जेईएस) अपने सातवें संस्करण के समापन के साथ एक बार फिर वैचारिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त उदाहरण बना।
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हैशटैग नहीं, हकीकत है सशक्तिकरण: तिलोनिया मॉडल गांव की महिलाओं ने रखी बात

जयपुर | 24 जनवरी 2026: शिक्षा, समाज और समकालीन मुद्दों पर राष्ट्रीय विमर्श को मंच देने वाला जयपुर एजुकेशन समिट (जेईएस) अपने सातवें संस्करण के समापन के साथ एक बार फिर वैचारिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सशक्त उदाहरण बना। समापन दिवस का मुख्य आकर्षण रहा सत्र “सच में हो रहा महिला सशक्तिकरण या सिर्फ हैशटैग”, जिसमें तिलोनिया मॉडल गांव से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता नौरोती देवी, कमला मेघवंशी और डॉ. श्रद्धा आर्य ने जमीनी हकीकत और सोशल मीडिया आधारित सशक्तिकरण के अंतर पर गहन विमर्श किया। वक्ताओं ने कहा कि असली सशक्तिकरण आंकड़ों और पोस्ट से नहीं, बल्कि गांवों की महिलाओं के जीवन में आए वास्तविक बदलाव से मापा जाना चाहिए।

इस अवसर पर हॉलिस्टिक लाइफ कोच राजेश्वरी ने भी जीवन मूल्यों और आत्मनिर्भरता पर उपयोगी लाइफ टिप्स साझा किए। इस अवसर पर सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा के प्रिंसिपल फादर संगीत राज, मुख्य आयोजक सुनील नारनौलिया, क्रेडेंट टीवी की टीम मानसी वर्मा, प्राप्ति, कुबेर भाटी, राज नारनौलिया, उपस्थित रहे।

समापन अवसर पर समिट के सेंट ज़ेवियर्स स्कूल नेवटा के प्रिंसिपल और सह आयोजक फादर संगीत राज एसजे ने कहा: “जयपुर एजुकेशन समिट का उद्देश्य केवल संवाद करना नहीं, बल्कि समाज को सोचने की दिशा देना है। अगला संस्करण और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें ग्रामीण शिक्षा, डिजिटल असमानता और रोजगारपरक शिक्षा जैसे मुद्दों को विशेष फोकस में रखा जाएगा।”

समापन दिवस का दूसरा महत्वपूर्ण सत्र रहा “क्या टिक-टॉक के युग में साहित्य अभी भी प्रासंगिक है?” इस सत्र में एएसपी सुनील प्रसाद शर्मा, लेखक मनोज वार्ष्णेय और कवि-लेखक अनुराग वाजपेयी ने साहित्य की भूमिका पर सार्थक संवाद किया। वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल दौर में भले ही कंटेंट का स्वरूप बदला हो, लेकिन साहित्य आज भी समाज को सोचने, सवाल उठाने और संवेदनशील बनाने का माध्यम बना हुआ है।

इसके अतिरिक्त विभिन्न विचारोत्तेजक सत्रों में समाज, जीवन और आध्यात्म से जुड़े विषयों पर संवाद हुआ। “आवाज़ में असर, शब्दों में वज़न” सत्र में डॉ. फिरोज़ खान के साथ बातचीत करते हुए इकराम राजस्थानी, रेशमा खान और नेकी राम आर्य ने संवाद की शक्ति और भाषा की जिम्मेदारी पर विचार रखे।

“आध्यात्मिक यात्रा के पड़ाव” सत्र में सुनील नारनौलिया के साथ डॉ. रेमंड चेरुबिन, शास्त्री कौसलेंद्र और वीणा मोदानी ने जीवन दर्शन और आध्यात्मिक मूल्यों पर चर्चा की।

“शास्त्रों से समाधान तक” सत्र में मॉडरेटर डॉ. राकेश कुमार के साथ प्रो केके शर्मा और सिद्धस्वरूप दास ने आधुनिक समस्याओं के शास्त्रीय समाधान प्रस्तुत किए।

“पेरेंटिंग स्टाइल क्लैश” सत्र में मॉडरेटर तृप्ति प्रेमी के साथ फादर संगीत राज, प्रो. डॉ. शुभा शर्मा और सुनील नारनौलिया ने बदलती पेरेंटिंग शैली और बच्चों की मानसिक ज़रूरतों पर संवाद किया।

दिन का समापन एक विशेष फैशन शो के साथ हुआ, जिसमें भारतीय संस्कृति और वेस्टर्न फैशन के फ्यूजन की झलक प्रस्तुत की गई।

छह दिनों तक चले इस शिखर सम्मेलन में शिक्षा व्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सामाजिक न्याय, संविधान और प्रतिरोध, युवाओं की चुनौतियां, स्वास्थ्य, साहित्य, संस्कृति, महिला अधिकार, मीडिया की भूमिका और भविष्य की शिक्षा प्रणाली जैसे विविध विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। देशभर से आए शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों और युवाओं ने इन सत्रों में सक्रिय भागीदारी की।

जयपुर एजुकेशन समिट:

प्रख्यात समाजसेवी स्वर्गीय श्री लक्ष्मण राम नारनौलिया जी की स्मृति में आयोजित यह शिक्षा का महाकुंभ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा, समाज और मानवीय मूल्यों पर निरंतर चलने वाली एक वैचारिक यात्रा है।

JR Choudhary Official | Verified Expert • 05 Aug, 2014 Chief Editor

Founder : Nav18 News. He is passionate about merging cutting-edge code with digital storytelling to redefine how the world consumes information.

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