मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और इसकी वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने स्थिति को संभालने के लिए अपने सदस्य देशों से आपातकालीन तेल रिजर्व जारी करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिलीज है।

11 मार्च 2026 को IEA के 32 सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से 400 मिलियन बैरल तेल अपने आपातकालीन स्टॉक से बाजार में उतारने की सहमति दी। यह कदम मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल निर्यात में भारी गिरावट के जवाब में उठाया गया है, जहां पूर्व-संघर्ष स्तर की तुलना में निर्यात अब 10% से भी कम रह गया है। IEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने बताया कि यह फैसला बाजार की अस्थिरता को कम करने और आपूर्ति व्यवधानों से निपटने के लिए लिया गया है। अमेरिका इस रिलीज में सबसे बड़ा योगदान दे रहा है, जबकि जापान जैसे अन्य देश भी तेजी से अपने हिस्से को उपलब्ध करा रहे हैं।

यह कदम वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश है, क्योंकि संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल परिवहन बाधित हो गया है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण मार्ग को अवरुद्ध करने की धमकी दी है, जिससे दुनिया भर में तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने खारग द्वीप पर अमेरिकी हमलों की पुष्टि की, जहां ईरान का मुख्य तेल निर्यात केंद्र स्थित है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने द्वीप पर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझकर बरकरार रखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बाधित की, तो तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमला किया जा सकता है। ट्रंप ने ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य सहयोगी देशों से नौसैनिक पोत भेजकर इस मार्ग को सुरक्षित करने में मदद करने की अपील की है। उन्होंने वादा किया कि मार्ग किसी भी कीमत पर फिर से खोला जाएगा।

ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाए रखने की बात कही और दावा किया कि तेहरान समझौता करना चाहता है, लेकिन शर्तें अभी कमजोर हैं, इसलिए अमेरिका तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य रूप से हार चुका है और आगे हमले हो सकते हैं अगर जरूरत पड़ी।

क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इजराइली सेना ने बताया कि ईरान ने सप्ताहांत में कई हमले किए, जिसमें मिसाइल और ड्रोन शामिल थे। इराक और लेबनान में ड्रोन हमले हुए, जबकि इजराइल के इलाकों को निशाना बनाया गया। बगदाद में अमेरिकी दूतावास परिसर पर भी ड्रोन हमला रिपोर्ट किया गया। इजराइल और अमेरिका ने ईरान के आंतरिक सुरक्षा ढांचे, बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन और अन्य सैन्य ठिकानों पर हमले तेज किए हैं। इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान ईरान में बदलाव की स्थितियां बनाने के लिए है।

संघर्ष अब 16वें दिन में है और दोनों पक्षों से हमले जारी हैं। इजराइल ने ईरान में हजारों हमले किए हैं, जबकि अमेरिका ने बड़े पैमाने पर बमबारी की है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल और गल्फ देशों पर हमले किए हैं। वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है कि यह युद्ध लंबा खिंच सकता है, जिससे ऊर्जा संकट गहरा सकता है।