जयपुर, 17 अगस्त — श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष उजागर सिंह डाबला ने सोमवार को कहा कि 23 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर देशभर से समाज के लोग उमड़ेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से यूजीसी आरक्षण नीति को पूरी तरह वापस लेने की मांग को आंदोलन की पहली प्राथमिकता बताया।
डाबला ने एक विशेष बातचीत में स्पष्ट किया कि यह सवाल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उन परिवारों के हक की लड़ाई है जिन तक आरक्षण का लाभ अभी तक नहीं पहुंच पाया है। उनके अनुसार, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी द्वारा तैयार “22 राज्यों की सेना” इस दिन दिल्ली कूच करेगी।
22 राज्यों से रैली का खाका
डाबला के अनुसार, 23 अगस्त की रैली में देश के 22 राज्यों से लोग हिस्सा लेंगे। सभी प्रदेश अध्यक्षों को अपनी-अपनी ताकत के साथ शामिल होने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रदर्शन में लाखों की संख्या में लोग पहुंच सकते हैं।
“ये सवाल हमारे अपने नहीं, बल्कि समाज के उन पीड़ित परिवारों के हैं जिनके हक की लड़ाई अभी अधूरी है,” डाबला ने कहा।
केंद्र से UGC रोलबैक की मुख्य मांग
डाबला ने केंद्र सरकार से सबसे बड़ी मांग रखी कि यूजीसी आरक्षण नीति को पूरी तरह रोलबैक किया जाए। उन्होंने कहा कि योग्यता आधारित आरक्षण से समाज को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक लाभ नहीं पहुंच रहा।
“आरक्षण उन परिवारों को मिलना चाहिए जो आर्थिक रूप से वास्तव में कमजोर हैं, न कि उन्हें जो पहले से संपन्न हैं,” डाबला ने कहा।
यह मांग युवा अधिकारों और सामाजिक न्याय के मुद्दे को केंद्र में रखकर रखी गई है।
राज्य सरकार से दूसरी मांग: पंचायती राज में EWS आरक्षण
राजस्थान सरकार से डाबला की दूसरी प्रमुख मांग है कि आगामी पंचायती राज चुनावों में ईडब्ल्यूएस वर्ग को आरक्षित सीटें दी जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह मांग पूरी नहीं हुई तो समाज आगामी चुनावों में वोट के जरिए विरोध दर्ज कराएगा।
डाबला ने बताया कि विभिन्न राज्यों के समाज नेताओं को शीर्ष नेतृत्व के आदेश पर लामबंद किया गया है। “बाबू साहब” के निर्देश पर सभी प्रदेश अध्यक्षों को रैली में अपनी ताकत के साथ शामिल होने को कहा गया है।
युवाओं से अपील
डाबला ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई पूरे समाज की है। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में लोगों को जंतर-मंतर पहुंचने का आह्वान किया।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और राज्य सरकार इस प्रदर्शन पर क्या रुख अपनाती हैं। आंदोलन की तैयारी तेज होने के साथ ही दोनों तरफ से बातचीत या प्रतिक्रिया की संभावना बनी हुई है।